“आतंकवादी पधारे मोरे अंगना, आतंकवादी पधारयो म्हारे देस,
म्हारे प्यारे गुलसन को जरावें, ये सब बदल-बदल कर भेस,
आतंकवादी पधारे मोरे अंगना, आतंकवादी पधारयो म्हारे देस|
उनके रहन-सहन के खातिर, छाड़ दी हमने घाटी है,
उनके संगी-साथी बुलवाए, जो कहाते, उल्फा- नक्सलवादी हैं,
उनके भव्य स्वागत को पधारे हुए हैं देस के सारे प्रदेस,
आतंकवादी पधारे मोरे अंगना, आतंकवादी पधारयो म्हारे देस|
माटी पर जब बूँद गिरे तो महके वो बारूद के जैसे,
उनकी असीम अनुकम्पा से, अब फसल भी लगे हथियार के जैसे,
सीने पर वो मूंग दरे हैं, हर अंग वो पहुँचावे हैं ठेस,
आतंकवादी पधारे मोरे अंगना, आतंकवादी पधारयो म्हारे देस|
उनकी अद्भुत हुंकार से, एकदम ही घबरा जावे हैं हम,
उनकी गोलियों कि टंकार से, न जाने कहाँ निकल जावेगा दम,
हर गली में उनका खौफ है पसरा, चाहे हो दिल्ली या कोई प्रदेस,
आतंकवादी पधारे मोरे अंगना, आतंकवादी पधारयो म्हारे देस|
उनको बैठ के पाल रहे हैं इस देस के सारे संविधानकारी,
मानवता को वो काट रहे हैं जैसे काटे कोई सब्जी-तरकारी,
इन अतिथियों ने इस देस को लूटा, पर बना ना इन पर कोई केस,
आतंकवादी पधारे मोरे अंगना, आतंकवादी पधारयो म्हारे देस|
“अतिथि देवो भवः”, ये पंक्ति हम कहते हैं ज़रूर,
पर जो हमसे करे दुस्मनी, तोड़ देवें हम उसका गुरूर,
हम सब से वो बच ना सकेंगे, जाकर उनसे कह दो ये संदेस,
क्योंकि अब वो वक़्त है आ गया जब,
आतंकवादी मुक्त हो मोरा अंगना, आतंकवादी मुक्त हो म्हारा देस|”
yakeen nahi hota ki tum aisa bhi likh sakte ho!!.A very heartfelt congrats 4 this one yaar! tumhari desh bhakti jhalak rahi hai n hindi ki prati pyaar bhi….agar sab aisa hi sochein toh kya baat hogi!!!truly inspiring n I take pride in standing by each word u say in this poem….So proud of u yaar….n so happy 4 u!!!
Comment by anupriya — July 9, 2009 @ 8:37 am |
HAAAAAAAAAAA
Thank you very much Anu Ji, for appreciating my work…
I am just trying to get more effective in terms of conveying my messages to people…
I assure you that on this blog, you will find each of my creations… very fruitful (I guess)
Thank you sooooooooooooo much
Comment by swapnesh27 — July 9, 2009 @ 8:44 am |